बड़े बोल न बोले

  नमस्ते मैं मुकेश हूं।

मेरे ब्लॉग में आपका तहे दिल से स्वागत करता हूं। इस ब्लॉग में मैं आपको रोचक शायरी बताऊंगा या आपके जीवन मार्गदर्शन के लिए रोचक उल्लेख को आपके समक्ष प्रस्तुत करूंगा जो आपको आपके जीवन जीने वे जिंदगी में रहने के तौर-तरीकों को बता कर आपको आपके जीवन संघर्ष को पूरा करने के लिए यह पोस्ट आपको अच्छा प्रोत्साहित करेगा।


रामायण में रावण ने घोर तप किया और तभी

ब्रह्मा जी रावण को वरदान देने हेतु प्रकट हुए।  रावण ने वरदान मांगा कि मुझे वरदान दीजिए कि मेरी मृत्यु किसी के हाथों ने हो। ब्रह्मा जी काफी चिंतित हुए की एक तो रावण इतना दुष्ट है और ऊपर से और ऐसा ही वरदान  मांग रहा है।ब्रह्मा जी ने रावण को समझाया कि जिसने इस धरती पर जन्म लिया है उसका तो मृत्यु होना ही है यही विधि का विधान है पर रावण अड़ गया और बोलने लगा कि मैं कुछ भी विधि-विधान नहीं जानता हूं। मुझे तो यही वरदान चाहिए ब्रह्मा जी ने कहा ठीक हैऔर यह कहकर ब्रह्मा जी सोचने लगे और माता सरस्वती से मदद की गुहार की और कहा कि हे माते इस दुष्ट की  बुद्धि फेरीए । तभी रावण ने कहा चलो ठीक है मुझे वर दीजिए कि मुझे मनुष्य और बंदरों के सिवा कोई और ने मार सके ब्रह्मा जी मान गए और उन्होंने उसे यह आशीर्वाद वरदान दे दिया ।और तथास्तु कह दिया रावण ने तो सोचा कि मनुष्य और बंदर तो मेरा भोजन है यह मेरे को क्या मारेंगे लेकिन उसे कल्पना भी नहीं कि थी कि एक दिन एक इंसान बंदरों के साथ मिलकर उसका विनाश कर देगा।

सीख-इससे हमें सीख मिलती है कि जब भी किसी इंसान को कोई बड़ी सफलता मिलती है तो उसे अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए ।  इसलिए  बड़े बोल नही बोलेने चाहिए कभी-कभी अहंकार में ऐसी बातें निकल जाती है जो आने वाले भविष्य में नुकसानदायक होती है।


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